Bible Verse in Hindi

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मंगलवार, 13 अप्रैल 2021

Daily Bible Verse of God's Love परमेश्वर का प्रेम

अप्रैल 13, 2021 0
Daily Bible Verse of God's Love परमेश्वर का प्रेम

Daily Bible Verse of God's Love परमेश्वर का प्रेम

आज का डेली बाइबिल वर्स बाइबिल में मसीह के प्रेम के विषय में है, जिनके अंतर्गत परमेश्वर के  प्यार के विषय में बताया गया है.,परमेश्वर का प्यार बहुत अद्भुत है,परमेश्वर के प्यार की शक्ति,परमेश्वर आपसे बहुत प्यार करते हैं.हमारे लिए परमेश्वर का प्यार कितना गहरा है | 




लूका - अध्याय 10

27 उस ने उत्तर दिया, कि तू प्रभु अपने

परमेश्वर से अपने सारे मन और अपने सारे

प्राण और अपनी सारी शक्ति और अपनी

सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख; और अपने

पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।


1 कुरिन्थियों - अध्याय 13

1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की

बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखू, तो मैं

ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई

झांझ हूं।

2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकू,

और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को

समझू, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास

हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न

रखू, तो मैं कुछ भी नहीं।

3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति

कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह

जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखू, तो

मुझे कुछ भी लाभ नहीं।

4 प्रेम धीरजवन्त है, और कृपाल है; प्रेम

डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं

मना .और मिलना लीं।

4 प्रेम धीरजवन्त है, और कृपाल है; प्रेम

डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं

करता, और फूलता नहीं।

5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी

भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा

नहीं मानता। 6 कुकर्म से आनन्दित नहीं

होता, परन्तु सत्य से आनन्दित होता है।

7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों

की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा

रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।

8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां


हों, तो समाप्त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो

जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।



यशायाह- अध्याय 49

15 क्या यह हो सकता है कि कोई माता

अपने दूधपिउवे बच्चे को भूल जाए और

अपने जन्माए हुए लड़के पर दया न करे?

हां, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे

नहीं भूल सकता।

16 देख, मैं ने तेरा चित्र हथेलियों पर

खोदकर बनाया है; तेरी शहरपनाह सदैव

मेरी दृष्टि के साम्हने बनी रहती है।


विलापगीत - अध्याय 3

22 हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की

महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी

दया अमर है।

23 प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी

सच्चाई महान है।

24 मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है,

इस कारण मैं उस में आशा रखूगा।

25 जो यहोवा की बाट जोहते और उसके

पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है।





नीतिवचन - अध्याय 8

17 जो मुझ से प्रेम रखते हैं, उन से मैं भी

प्रेम रखती हूं, और जो मुझ को यत्न से

तड़के उठ कर खोजते हैं, वे मुझे पाते हैं।


यूहन्ना - अध्याय 3

16 क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम

रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे

दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे,

वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।


1 यूहन्ना - अध्याय 4

16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता

है, उस को हम जान गए, और हमें उस

की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में

बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है;

और परमेश्वर उस में बना रहता है।


व्यवस्थाविवरण - अध्याय 7

9 इसलिये जान रख कि तेरा परमेश्वर

यहोवा ही परमेश्वर है, वह विश्वासयोग्य

ईश्वर है; और जो उस से प्रेम रखते और

उसकी आज्ञाएं मानते हैं उनके साथ वह

हजार पीढ़ी तक अपनी वाचा पालता,

और रन पर करूणा करता रहता है।




यूहन्ना - अध्याय 14

21 जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह

उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता

है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से

मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम

रखूगा, और अपने आप को उस पर प्रगट

करूंगा।


व्यवस्थाविवरण - अध्याय 4

29 परन्तु वहां भी यदि तुम अपने परमेश्वर

यहोवा को ढूंढ़ोगे, तो वह तुम को मिल

जाएगा, शर्त यह है कि तुम अपने पूरे मन

से और अपने सारे प्राण से उसे ढूंढ़ो।


यहोशू - अध्याय 1

5 तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न

सकेगा; जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही

तेरे संग भी रहूंगा; और न तो मैं तुझे धोखा

दूंगा, और न तुझ को छोडूंगा।


मत्ती- अध्याय 28

और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदैव

तुम्हारे संग हूं|


गुरुवार, 25 मार्च 2021

Bible Verse Of The Day -वह हमें सब सत्य में लेकर चलता है

मार्च 25, 2021 0
Bible Verse Of The Day -वह हमें सब सत्य में  लेकर चलता है

 


वह हमें सब सत्य में लेकर चलता है



"लेकिन जब वह, अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो वह

तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से

कुछ न कहेगा, बल्कि जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा,

और आने वाली बातों को तुम पर प्रगट करेगा।" यूहन्ना 16:13


ईश्वर के हर एक सेवक को पवित्र-आत्मा द्वारा चलाए जाना है। मनुष्य में यह योग्यता नहीं है कि वह अपना मार्गदर्शन कर सके। 


हमारा मार्ग, चाहे वह कैसी भी मुश्किलों से भरा क्यों न हो, प्रभु द्वारा तय किया गया है, और हमें उस पर चलना है।


मसीह ने यह इंतजाम किया कि उनकी गिरजा एक परिवर्तित देह हो - ऐसी देह जो स्वर्ग के प्रकाश से जगमगाए, जिसमें उस ईश्वर की ज्योति हो जो हमारे साथ हैं।


 उन्होंने यह चाहा कि हर एक मसीही ज्योति और शांति के आत्मिक वातावरण में रहे। ऐसे व्यक्ति की उपयोगिता की कोई सीमा नहीं होती जो अपनी खुदी से इनकार करके पवित्र-आत्मा को अपने हृदय में काम करने की जगह देता है, और एक ऐसा जीवन जीता है पूरी तरह

ईश्वर को अर्पित है।

आज हमारे पास भी पवित्र-आत्मा दिए जाने की प्रतिज्ञा वैसे ही निश्चित तौर पर है जैसे वह पहले शिष्यों के लिए थी। आज भी ईश्वर ऊपर से स्त्री व पुरुषों को उसी सामर्थ्य से भरेंगे, जिससे उन्होंने पिन्तेकुस्त के दिन उद्धार का वचन सुनने वालों को भरा था।

 ठीक इसी घड़ी, पवित्र आत्मा और उनकी कृपा उन सबके लिए उपलब्ध है जिन्हें उसकी ज़रूरत है, और जो ईश्वर के वचन को ठीक वैसे ही सहज रूप में स्वीकार करते हैं जैसा वह है।


अपने बच्चों को यह सिखाएं कि यह उनका विशेषाधिकार है कि वे प्रतिदिन

पवित्र-आत्मा का बपतिस्मा लें।


जो पवित्र-आत्मा के प्रभाव में रहेंगे, उनमें धार्मिक जुनून न होगा बल्कि वे स्थिर व शांत होंगे, और अपने विचार, शब्द और काम में बढ़-चढ़ कर दिखावा करने से बचे रहेंगे।

धोखे में डालने वाली भ्रामक शिक्षाओं के बीच, ईश्वर का आत्मा उनका मार्गदर्शक और उनकी ढाल होगा जिन्होंने सत्य की साक्षी का विरोध नहीं किया, 

और उस आवाज़ को छोड़ बाकी सारी आवाज़ों को दबा दिया, जो उनके पास से आती है जो खुद सत्य हैं।


जिनको सत्य ने पवित्र कर दिया है, उनके अन्दर से संसार पर एक पवित्र प्रभाव पड़ेगा। पवित्र-आत्मा का काम मानवीय हृदयों पर काम करना, और ईश्वर की बातों को लेकर उन्हें मनुष्यों को दिखाना है।


मंगलवार, 23 मार्च 2021

Ever Read the Bible All of the Way Through? Review

मार्च 23, 2021 0
 Ever Read the Bible All of the Way Through? Review

 

 Ever read the Bible All of the Way Through?
 

That’s a great question! One that many Christians haven’t much thought about! In fact, the vast majority of Christians have never even considered it, let alone done it.

 

That’s about to change for many of them!
 

The reason is because of a new reading program called Through the Bible . . . as It Happened!  It re-arranges the Bible material into a chronological format. That means the events are re-arranged so the reader reads them in the order they occurred - much like a novel. The normal way the Bible is arranged is “themed.” That means the material is all put together according to the subject, not according the when it happened.

 

For example, 1 & 2 Samuel, 1 & 2 Kings, and 1 & 2 Chronicles all cover much of the same material. It is a theme: the history of Israel from the time of the kings until the country’s dissolution. If read as they appear in the Bible, the reader reads about that history not once, not twice, but three times.  The chronological version puts all of them together seamlessly - so the reader reads that part of Israel’s history just once, and with the ability to compare the nuances of each of the three accountings. And they do differ in many of the details.

 

That’s just the start of it! Most of the prophets had their ministries during that part of Israel’s existence, but their books appear long after those books, way back in the end section of the Old Testament.

 

The author of the program, David Shreve, has put all of those prophetical writings where they belong, verse by verse. It completely changes a person’s understanding of the Bible! The same is true of Job, the Psalms, Proverbs and the other books of the Old and New Testaments. Each is placed where they occurred. Imagine reading a psalm when the event which precipitated its writing occurred. That psalm just comes to life!

 

All of the Bible - from Genesis to Revelation - has been re-arranged. It’s just fascinating!

 

And there’s more. The author has filled Through the Bible . . . as It Happened with over 1,200 pages of commentary notes, all written by himself. His education comes from Cedarville University, where he received a degree in Bible and in Greek. He has researched and taught the Bible for nearly 50 years, so he is certainly not a novice in this field. He would be described as an evangelical conservative.

 

This program began in 1974, when there were no chronological Bible reading systems in place, and has been continually revised since that time. Launched to the general public in 2018, it may become a standard in Christian circles.

 

It is available here.

 

 

A Great Way to Read Your Bible! Review

मार्च 23, 2021 0
A Great Way to Read Your Bible! Review

 

 A Great Way to Read Your Bible!

 




A new Bible reading program has been released which approaches the Bible in a new and unique way than most people are used to. It offers the reader an opportunity to read all of the ways through the Bible - to do it chronologically - and to do it in just a year! For people who have never done that, which includes the vast majority of people, it offers them a chance to stand out in their peer groups, and to satisfy their deep desire to please the God they serve.

 

It is a known fact that:

 

1 - Less than 10% of all Christians have ever read the Bible all of the way through. Many have never even considered doing it or thought it was not attainable for them.

 

2 - Most Christians have difficulty understanding many parts of the Bible. Although a few major Bible texts are familiar and well understood, large sections of the Bible remain obscure to the average layman.

 

3 - Because 21st Century life is so fast-paced, many Christians have left meaningful devotional times with God out of their lives. That may be because they have not known how to confidently approach this subject.

 

The new program is Through the Bible . . . as It Happened.  The person who uses this program will gain a much better understanding of Scripture because of how the program works and because of what features are included in it.

 

In short, it is a chronological reading of the Bible, with extensive helps included with it. Chronological means “in order”. The Bible as it appears in its standard form takes a “themed” approach to its material. The authors who wrote the Scriptures were interested in their particular situations and events. So they compiled their work in what we call “book” formats, the subject matter is their guide.

 

There are 39 books in the Old Testament and 27 in the New. They cover a time span of 4,500 years and they are not neatly placed in the order that the events occurred. In fact, everything jumps back and forth. That makes it hard for the reader to comprehend much of what takes place and the relationship of events to each other are largely lost.

 

The author of the program. David Shreve has re-arranged the Bible’s material so that it flows smoothly in order. The event follows an event in the order in which it happened. That’s how most novels are written. From the beginning scenes, through the myriad of events, leading to a conclusion!

 

So, one of the great things about this program is how it works - that is its foundation.

 

But there are other chronological approaches to the Bible in existence. Some are simple general re-arrangements taking up no more than a piece of paper. Some are complete hardcover volumes that take the Scripture text and re-arrange it within the volume. What makes this program stand out from them?

 

1 - The re-arrangement itself. The author began this effort in 1974, long before any such materials existed.  Through the years, as he read through the Bible each year himself using this program, he researched and compared - and revised - and revised - continually, until he released his program to the general public in 2018. There is probably not another chronological program this thorough in its development. Getting the order of events exactly right was a priority for him and a painstaking effort - and the results prove the value of that effort.

 

2 - The study helps which are included. It is hard to find a chronological reading program that explains some of the more difficult-to-understand portions of the Bible. Most simply attempt a re-arrangement of the Scriptures and let it go at that. That’s not enough for most laymen. They need some good, solid explanations of the material they are reading.

 

Mr. Shreve is degreed in the Bible and has a minor in Greek. He has spent his life studying the Bible, from his days at Cedarville University until the present. His library consists of hundreds of volumes in theology and Bible-related books. His views are mainstream and evangelical. In the few instances where he diverges from orthodoxy, he alerts the reader that he is expressing a minor view. The reader doesn’t have to worry.

 

The notes are extensive, too. The project is over 1,200 pages, so not much is left out. He treats some of the Biblical material from a theological perspective and some from a devotional perspective. He feeds the head and the heart!

 

The reader would be well served in using his material. It can be found here.

 

 

रविवार, 21 मार्च 2021

Jesus died on the cross, सूली और व्यवस्था

मार्च 21, 2021 0
Jesus died on the cross, सूली और व्यवस्था


Jesus died on the cross सूली और व्यवस्था



“जो बुद्धिमान हो वही इन बातों को समझे, जो समझदार हो वह इन
बातों को जानें। यहोवा के मार्ग सीधे हैं। धर्मी उनमें चलते रहेंगे,
लेकिन अधर्मी उनमें ठोकर खाकर गिर पड़ेंगे।" होशे 14:9

 सूली आकाश के दूतों से बात करती है, और उन्हें यह बताती है कि ईश्वर ने मनुष्यों

जो पाप में गिरा है उस संसार से भी, और जो पाप में नहीं गिरा है उस संसार से

को कितना कीमती जाना है, और यह कि वह प्रेम कितना महान् है जिससे उन्होंने मनुष्य

से प्रेम किया है। मसीह की सूली संसार, स्वर्गदूतों, और मनुष्यों के सामने ईश्वरीय व्यवस्था

के बारे में यह गवाही देती है कि बदली नहीं जा सकती।

मसीह की मृत्यु को हमेशा के लिए इस बात की दलील बन जाना था कि ईश्वर

की व्यवस्था ऐसी ही अपरिवर्तनीय है जैसे कि उनका सिंहासन। यह हकीकत कि ईश्वर

ने अपने पुत्र को भी नहीं छोड़ा, जो मनुष्यों की जमानत है, एक ऐसी दलील है जो अनन्त

में हर एक पापी और संत के सामने, और ईश्वर की सारी सृष्टि के सामने यह गवाही देती

रहेगी कि वे उनकी व्यवस्था को तोड़ने वाले को किसी भी रीति से क्षमा नहीं करेंगे। ईश्वर

की व्यवस्था के खिलाफ किया गया हर एक अपराध, चाहे कितना भी मामूली क्यों न

हो, वह गिनती में ले लिया गया है, और जब न्याय की तलवार हाथ में ले ली जाएगी,

तो वह मन न फिराए हुए पापियों के साथ भी वही करेगी जो ऊपर से आकर पीड़ा भोगने

वाले के साथ किया गया।

मसीह के सत्य काम के आरोपण द्वारा, एक पापी यह एहसास कर सकता है कि उसे

क्षमा कर दिया गया है, और वह यह जान सकता है कि व्यवस्था अब उसे दोषी नहीं

ठहराती, क्योंकि अब वह उसके सारे विधि-विधानों के साथ सुसंगत है; यह उसका

विशेषाधिकार है कि एक अविश्वासी और पापी के होने वाले न्याय के बारे में सुन-पढ़

कर वह खुद को निर्दोष माने। विश्वास द्वारा वह मसीह के सत्यकाम पर अपना दावा कर

सकता है। अपने आपको एक पापी- ईश्वर की पवित्र व्यवस्था को तोड़ने वाले के रूप

में जानते हुए, वह मसीह के सिद्ध आज्ञापालन को, और संसार के पापों के लिए कलवरी

पर उनकी मृत्यु को देखता है, और उसके पास यह आश्वासन है कि वह मसीह के

बलिदान व योग्यता में उसके विश्वास द्वारा धर्मी ठहरता है। उसे यह एहसास हो जाता

है

कि उसकी ओर से ईश्वर के पुत्र ने व्यवस्था का पालन किया है, और अब विश्वास करने

वाले पापी के ऊपर व्यवस्था तोड़ने का दण्ड नहीं पड़ता। मसीह का आज्ञापालन विश्वास

करने वाले पापी को मसीह के उस सत्यकाम से सुसज्जित करता है जो व्यवस्था की माँग



सूली हमें प्रकृति को समझने में मदद करती है।

"क्योंकि, हे यहोवा, आपने मुझे अपने कामों से आनन्दित किया है,

मैं आपके हाथों के कामों के कारण आनन्द से आपका

भजन गाऊँगा।" भजन संहिता 9214

प्रकृति में जो कुछ सीखने के लिए रखा है, मनुष्य वह खुद नहीं सीख सकता। अगर

ईश्वरीय समझ द्वारा उसका मार्गदर्शन नहीं हो रहा है, तो वह प्रकृति और प्रकृति की

व्यवस्था को प्रकृति के ईश्वर से ज़्यादा बड़ा बना देगा। यही वजह कि विज्ञान के बारे में

मानवीय विचार अकसर ईश्वर के वचन की शिक्षा का विरोध करते हैं। लेकिन जो मसीह

के जीवन की ज्योति पा लेते हैं, उनके लिए प्रकृति फिर से जीवंत हो उठती है। सूली

से चमकने वाली ज्योति में, हम प्रकृति में से मिलने वाली शिक्षा को सही तरह समझ

सकते हैं।

छुटकारे की योजना में ऐसे रहस्य रखे हैं जिनकी गहराईयों को मानवीय समझ नाप

नहीं सकती - ऐसी बातें जिनकी व्याख्या मानवीय बुद्धि नहीं कर सकती - लेकिन प्रकृति

हमें ईश्वरत्व के रहस्य के बारे में बहुत कुछ सिखा सकती है। इसलिए, युवाओं में मनों

को, जहाँ तक हो सके, प्रकृति की पुस्तक में से सीखना है। हर एक झाड़ी, हर एक फल

देने वाला पेड़, सारा वनस्पति, हमारे लाभ के लिए दिया गया है। ईश्वर के राज्य के भेद

एक बीज के बढ़ने में देखे जा सकते हैं। ईश्वर ने प्रकृति की रचना इस तरह की है कि

वह मनुष्य के लिए एक ऐसी मार्गदर्शिका हो जो उसे आज्ञा उल्लंघन के मार्ग से वापिस

ईश्वर के पास ले जाए। पवित्र आत्मा के मार्ग-दर्शन में प्रकृति का गहन अध्ययन करने

की ज़रूरत है। प्रकृति की मामूली बातों में प्रभु बड़े-बड़े पाठ सिखा रहे हैं, और मानवीय

सोच-समझ में पवित्र सत्यों की जानकारी दे रहे हैं।

सूर्य की हर एक किरण, खाने का हर एक निवाला, पानी की हर एक बूंद, छुटकारे

के प्रेम का उपहार हैं और हर एक पापी से निवेदन करते हैं कि वह ईश्वर के साथ

मेल-मिलाप कर ले।

सूर्य व चन्द्रमा प्रभु ने बनाए, और आकाश को शोभायमान करने वाला एक भी तारा

ऐसा नहीं है जो ईश्वर ने नहीं बनाया। हमारे खाने की मेज़ पर एक भी ऐसी चीज़ नहीं

है जो हमें जीवित रखने के लिए उन्होंने नहीं बनाया। इन सभी पर ईश्वर की छाप और

मोहर लगी है। मनुष्य को सब कुछ भरपूरी से उस एक अवर्णननीय उपहार द्वारा दिया गया

है - ईश्वर के एकलौता पुत्र द्वारा।




मसीह ने हमारे लिए सूली सही

"इस प्रकार मनुष्य के रूप में प्रगट होकर स्वयं का दीन
किया और यहाँ तक आज्ञाकारी रहे कि मृत्यु, वरन्
सूली की मृत्यु भी सह ली।" फिलिप्पियों 2:8


जो आनन्द उनके सामने रखा था, उसको देखते हुए मसीह ने सूली की पीड़ा को

सह लिया, और सारे तिरस्कार को एक तरफ हटा कर सदा के लिए पिता के दाहिने

विराजमान हो गए। वे सूली पर संसार के लिए बलिदान हुए, और इस बलिदान के द्वारा

ईश्वर की ओर से दी जाने वाली सबसे बड़ी आशीष आती है : पवित्र आत्मा का वरदान।

यह आशीष उन उसके लिए है जो मसीह को ग्रहण करते हैं।

पाप में गिरा हुआ यह संसार एक ऐसे बड़े युद्ध के मैदान का नज़ारा बना हुआ है जैसा

सारे स्वर्गलोक और पृथ्वी की शक्तियों ने आज तक नहीं देखा है। पृथ्वी को एक ऐसा

रंगमंच होने के लिए नियुक्त किया गया जिस पर भलाई और बुराई, व स्वर्ग और नर्क के

बीच एक ज़बरदस्त संघर्ष होना था। इस संघर्ष में हर एक मनुष्य का हिस्सा है; इसमें कोई

तटस्थ नहीं रह सकता। मनुष्यों को संसार के मुक्तिदाता का या तो स्वीकार करना है

उनका इनकार करना है। सभी गवाह हैं, या तो उनके पक्ष में, या उनके विरोध में। जो

मसीह के साथ मिलकर इस संघर्ष में उनके विश्वासयोग्य योद्धा के तौर पर युद्ध कर रहे

हैं, मसीह उन्हें अपने झण्डे के नीचे आने के लिए कहते हैं कि वे जीवन का मुकुट पाएं।

वे ईश्वर के बेटे व बेटियों के तौर पर स्वीकार कर लिए गए हैं। मसीह उनके पास अपना

यह आश्वासन छोड़ कर गए हैं कि जो सत्य की ख़ातिर उनके अपमान व पीड़ा में सहभागी

होंगे, उन्हें स्वर्ग के राज्य में बड़ा उपहार मिलेगा।

मसीह की सूली पृथ्वी और नर्क की हर एक शक्ति को चुनौती देती है, और अंतत:

उसका नाश करती है। सूली में सारी शक्ति केन्द्रित है, और उसमें से ही सारी शक्ति

निकलती है। वह आकर्षण का बड़ा केन्द्र है क्योंकि उस पर मसीह ने मानव जाति के

लिए अपना जीवन दिया। यह बलि इसलिए दी गई कि मनुष्य को उसकी पहले जैसी

सिद्धता में पहुँचाया जा सके; बल्कि, उससे भी कहीं बढ़ कर। यह बलि इसलिए दी गई

कि उसका पूरा चरित्र बदल कर नया कर दिया जाए, कि उसे जयवंत से भी बढ़ कर

बना दिया जाए। जो मसीह की सामर्थ्य में ईश्वर और मनुष्य के बड़े शत्रु पर जय पाते

हैं, वे स्वर्ग में उन दूतों से भी बड़ा स्थान पाएंगे जो कभी पाप में गिरे ही नहीं।



करुणा और न्याय सूली पर मिल गए

'करुणा और सत्य आपस में मिल गए हैं, सत्य काम
और मेल-मिलाप ने एक-दूसरे का चुम्बन किया है।"
भजन संहिता 85:10

न्याय और करुणा दूर खड़े थे, एक-दूसरे के विरोधी थे, और एक गहरी खाई ने उन्हें

अलग किया हुआ था। तब, प्रभु हमारे मुक्तिदाता ने अपने ईश्वरत्व को मनुष्यत्व में लपेटा,

और मनुष्यों की ओर से एक ऐसा चरित्र तैयार किया जिसमें कोई दाग या धब्बा नहीं था।

फिर उन्होंने अपनी सूली को स्वर्ग और पृथ्वी के बीच खड़ा किया, और उसे आकर्षण

की ऐसी चीज़ बना दिया जो स्वर्ग और पृथ्वी दोनों को आकर्षित करती है, और न्याय

और करुणा को खाई के दोनों छोर से एक-दूसरे की तरफ लाती है। और सूली पर उन्हें,

जो ईश्वर के समकक्ष हैं, सारे अन्याय और पाप को उठाए हुए देखा गया। न्याय ने संतोष

से पूरी भक्ति के साथ सूली के सामने यह कहते हुए अपना सिर झुकाया, “पूरा हुआ।"

हमारी ओर से चढ़ाई गई इस भेंट द्वारा हम एक बड़ी अनुकूल जगह पर पहुँचाए गए

हैं। एक पापी, मसीह की शक्ति से पाप की अधीनता में से निकाले जाकर, ऊँचे पर उठाई

गई सूली के पास आता है, और उसके सामने पूरा समर्पण करता है। तब मसीह यीशु में

एक नई सृष्टि की रचना होती है। पापी को धोकर शुद्ध किया जाता है, और उसे एक नया

हृदय दिया जाता है। पवित्रता के लिए अब कुछ करना बाकी नहीं रहा। छुटकारे के काम

के साथ ऐसे परिणाम जुड़े हैं जिनकी कल्पना करना भी मनुष्य के लिए मुश्किल है। जो

मनुष्य ईश्वरीय छवि की समानता में ढलना चाहते हैं, उनके लिए ऐसे स्वर्गीय ख़ज़ाने और

श्रेष्ठ सामर्थ्य दिए जाने वाले हैं जो उन्हें उन स्वर्गदूतों से भी ऊँचा स्थान देंगे, जो कभी

गिरे नहीं हैं। जंग हो चुकी है, जीत हासिल की जा चुकी है। स्वर्ग के प्रभु को पाप और

सत्यकाम के बीच हुए विवाद ने ऊँचा उठाया, और बचाए हुए मानवीय परिवार, पापरहित

स्वर्गलोक, बुराई के सारे नर्कदूतों - सबसे ऊँचे से लेकर सबसे नीचे के बीच में, ईश्वर

की पवित्रता, दया, भलाई और बुद्धि को स्थापित किया।

सूली पर मसीह वह माध्यम थे जिनके द्वारा करुणा और सत्य आपस में मिल गए,

और सत्य काम और मेल-मिलाप ने एक-दूसरे का चुम्बन किया।

इस भेंट की महानता यह थी कि इसमें मनुष्यों को धन्यवाद और स्तुति के संगीत का

ऐसा विषय दिया गया है, जो सारे समय में, और फिर अनन्त में सदा-सर्वदा सुनाई देता

रहेगा।



 सूली शैतान के शासन का पर्दाफाश करती है

'जब उन्होंने प्रधानों व अधिकारियों को उनके द्वारा
निरस्त्र कर दिया, तब उन पर विजय प्राप्त कर उनका
खुल्लम-खुल्ला तमाशा बनाया।" कुलुस्सियों 2:15

कलवरी की सूली पर प्रेम और अहम् एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े थे। यहाँ वे

अपने सबसे बड़े और साफ रूप में प्रगट हुए। मसीह सिर्फ शांति और आशीष देने के लिए

जीए, और, उनको मार डालने द्वारा, शैतान ने ईश्वर के प्रति अपनी नफरत की बुराई को

प्रगट किया। उसने यह साबित कर दिया कि उसके विद्रोह की असली वजह ईश्वर को

उनके सिंहासन से हटाना, और जिनके द्वारा ईश्वर का प्रेम प्रगट हुआ, उन्हें मिटाना था।

मसीह के जीवन और मृत्यु द्वारा, मनुष्यों के मन के विचार भी प्रगट होते हैं। चरनी

से लेकर सूली तक, मसीह का जीवन आत्म-समर्पण की बुलाहट, और पीड़ा के साथ

संगति का जीवन था। उनके जीवन ने मनुष्यों के उद्देश्यों को बेनकाब कर दिया। यीशु स्वर्ग

के सत्य के साथ आए, और जितने पवित्र आत्मा की आवाज़ सुन रहे थे, वे उनकी तरफ

आकर्षित हुए। लेकिन अपने अहम् की पूजा करने वाले, शैतान के राज्य के थे। मसीह के

प्रति अपनी मनोदशा द्वारा, हर एक यह दर्शा देता है कि वह किसकी ओर है। और इस

तरह, हर एक अपना न्याय खुद ही करता है।

अंतिम न्याय के दिन, खोई हुई हर एक आत्मा, उसके द्वारा किए गए सत्य के इनकार

को पूरी तरह समझ लेगी। सूली सबके सामने होगी, और उसका पूरा मर्म हर एक उस

मन पर प्रगट हो जाएगा जो अविश्वास में अंत तक अंधा बना रहा। सूली के दर्शन, और

उस पर चढ़ाई गई रहस्यमयी बलि के सामने, सारे पापी दोषी ठहरेंगे। हर एक झूठा बहाना

हटा दिया जाएगा। मानवीय अहम् का धर्म उसके पूरे घिनौने रूप में प्रगट हो जाएगा। मनुष्य

देखेंगे कि उन्होंने क्या चुना था। जब सारे हृदयों के विचार प्रगट हो जाएंगे, तब स्वामीभक्त

और विद्रोही दोनों मिलकर यह ऐलान करेंगे, "हे संतों के राजा, आपके मार्ग न्यायपूर्ण और

सत्य हैं। हे प्रभु, कौन आपका भय न मानेगा, और आपके नाम की महिमा न करेगा?..

आपका न्याय प्रगट हो गया है।"

पृथ्वी को हालांकि स्वर्गीय हिसाब की गिनती में से काट दिया गया था, और स्वर्गीय

बातों के साथ उसकी कोई सहभागिता नहीं रही थी, लेकिन यीशु ने उसे फिर से महिमा

की परिधि में ला खड़ा किया है।


पूरी करता है।


बुधवार, 17 मार्च 2021

Best Bible message about Goodfriday 2021,bible Verse About Good Friday 2021

मार्च 17, 2021 0
Best Bible message about Goodfriday 2021,bible Verse About Good Friday 2021

 

हमें प्रतिदिन अपना क्रूस उठाना है



'अगर कोई मनुष्य मेरे पीछे आना चाहे, तो वह

अपने अहम् का इनकार करे, अपने प्रतिदिन की सूली

उठा ले, और मेरे पीछे हो ले।"

लूका 9:23

सिर्फ सूली की शक्ति ही मनुष्य को पाप की मज़बूत पकड़ से छुड़ा कर उससे अलग कर सकती है। पापी को बचाने के लिए मसीह ने अपने आपको दिया। जिनके पाप क्षमा हो गए हैं, जो मसीह से प्रेम करते हैं, वे उनके साथ मिल जाएंगे। वे मसीह का जुआ उठाएंगे।

 यह जुआ उनके लिए एक बाधा नहीं होगी, उनके सत्य कामी जीवन में एक झुंझलाहट भरी बेगारी न होगी। नहीं! मसीह का जुआ ही तो वह माध्यम हैं जिसके द्वारा मसीही जीवन एक खुशी और आनन्द का जीवन होगा। एक मसीही को ईश्वर द्वारा किए

गए उस काम पर विचार करने के द्वारा आनन्दित होना है जो उन्होंने अपने एकलौते पुत्र को संसार के लिए मरने देने में किया है, "कि जो कोई उनमें विश्वास करे, वह नाश न हो बल्कि अनन्त जीवन पाए।"

जो राजकुमार इम्मानुएल (ईश्वर हमारे साथ हैं) के खून में डूबे झण्डे के नीचे खड़े होते हैं, उन्हें मसीह की सेना में विश्वासयेग्य योद्धा होना है। उन्हें विश्वासघाती नहीं होना है, उन्हें कभी बेईमान नहीं होना है। 

ऐसे बहुत से जवान हैं जो स्वेच्छा से जीवन के राजकुमार – मसीह के साथ आ खड़े होंगे। लेकिन अगर उन्हें मसीह के साथ खड़े रहना है, तो उन्हें अपने आदेश पाने के लिए लगातार अपने नायक यीशु के सामने देखते रहना होगा। अगर वे यीशु के योद्धा हैं तो वे शैतान के अधीनता में रहते हुए उसकी मदद नहीं कर सकते, क्योंकि तब वे उनके शत्रु बन जाएंगे; वे उन पर किए गए पुण्य भरोसों को तोड़ देने वाले साबित होंगे। सूली बिना शिकायत किए और बिना कुड़कुड़ाए उठानी है। और उसे उठाते हुए आप पाएंगे कि वह आपको ऊँचा उठा रही है। आप यह पाएंगे कि उसमें दया, संवेदना और तरस खाने वाला प्रेम जीवित है।

 सूली उठाने के अपने अनुभव द्वारा आप यह कह सकेंगे, “मैं जानता हूँ कि मेरा छुड़ाने वाला जीवित है, और क्योंकि वह जीवित है, इसलिए मैं भी जीवित रहूँगा।" यह कितना बड़ा आश्वासन है!




हम स्वयं का इंकार करते व अपना क्रूस उठाते हैं


“मैं मसीह के साथ सूली पर चढ़ाया गया हूँ। अब मैं जीवित नहीं रहा

बल्कि मसीह मुझ में जीवित है, और अब मैं जो शरीर में जीवित हूँ,

तो सिर्फ उस विश्वास से जीवित हूँ जो ईश्वर के पुत्र पर है,

जिन्होंने मुझ से प्रेम किया और अपने आपको मेरे लिए दिया।"

गलातियों 2:20

मसीह पाप में गिरे हुए मनुष्य के लिए सूली पर चढ़ाए गए। लेकिन खुद को मसीही कहने वाले बहुत से लोगों के लिए यह घटना कुछ नहीं है। अपने व्यवहार से वे सूली का इनकार करते हैं।

 वे यह स्वीकार करते हैं कि मसीह सूली पर मरे, लेकिन इसमें क्योंकि उनके लिए भी सूली की चढ़ने का अनुभव रखा है, इसलिए वे पीड़ा के वे पाठ सीखना नहीं चाहते जो उन्हें अहम् के इनकार और आत्म्-त्याग की ओर ले जाते हैं। वे सिर्फ नामधारी मसीह हैं। उनके विश्वास का केन्द्रिय बिन्दु सूली पर चढ़ाए गए और

मर-कर-जी-उठे मसीह नहीं हैं जो उन सबको, जो उन्हें ग्रहण करते हैं, ईश्वर के बेटे और बेटियाँ होने का विशेषाधिकार देते हैं। स्वर्ग और अनन्त जीवन के लिए पाप की दुष्टता के सारे आनन्द त्याग दें। जिनमें सच्ची खुशी की एक बूंद भी नहीं है, ऐसी स्वार्थी लालसाओं के थोड़े से दिन अनन्त के

उस आनन्द के सामने क्या हैं जो एक विश्वासी आत्मा का इंतज़ार कर रहा है? मसीह के प्रेम को अपनी आत्मा से दूर न रखें। अगर आपको उनके प्रेम का ठोस सबूत चाहिए, तो कलवरी की सूली के सामने देखें। सारा स्वर्ग गहरी दिलचस्पी से यह देख रहा है कि आप क्या करने वाले हैं। 

जब आपके लिए तैयार आशीषों को आप अनदेखा करते हैं, तब स्वर्गदूत हैरान हो जाते हैं। अगर आप मसीह के प्रेम का कोई जवाब नहीं देंगे, तो आख़िर में आप विद्रोही और हठीले हो जाएंगे। 

पौलुस को यह एहसास था कि उसकी परिपूर्णता उसमें नहीं बल्कि पवित्र आत्मा की उपस्थिति में थी, और वह शक्ति जो उसके मनोभाव में भरी रहती थी, उसके द्वारा वह हर एक विचार को बन्दी बना कर मसीह के चरणों पर ला सकता था.... प्रेरित की शिक्षा में मसीह उसके केन्द्र-बिन्दु थे। "मैं जीवित हूँ," उसने यह घोषणा की, "फिर भी मैं नहीं बल्कि मसीह मुझमें जीवित हैं।" 

अहम् छुप गया, और मसीह प्रगट होकर ऊँचे उठाए गए। जो दूसरों के भले के लिए अपने अहम् का इनकार करते हैं, और जो कुछ उनके पास है उसे मसीह की सेवा में अर्पित करते हैं, तो वे उस खुशी को पाएंगे जो एक स्वार्थ से भरा मनुष्य पाने की कोशिश तो करता है, पर नाकाम रहता है।




हम अपनी सूली उठा कर मसीह के पीछे चलते हैं


"मेरी भेड़ें मेरी आवाज़ सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूँ,

और वे मेरे पीछे चलती हैं।" यूहन्ना 10:27

यह ज्ञान कितना मूल्यवान है कि हमारे एक ऐसे विश्वासयोग्य मित्र हैं, जो हममें एक ऐसा श्रेष्ठ और उच्च चरित्र आरोपित करते हैं जो हमें स्वर्गीय स्थानों में स्वर्गदूतों के साथ संगति करने लायक बनाता है! प्रभु अपने सभी बच्चों के रखवाली करते हैं। उनके बच्चों के पास ऐसी शांति है जो न तो यह संसार ले सकता है, न दे सकता है।

 पृथ्वी के सुख-वैभव खो जाने से वे न तो निराश होते हैं, न बेघर होते हैं। मसीह संसार को देखते हैं कि वह सुख-संपत्ति पाने के लिए हर समय भाग-दौड़ कर रहा है। वे देखते हैं कि बहुत से लोग संसार का धन पाने के लिए कभी एक और कभी दूसरा तरीका अपनाते हैं जिनके द्वारा वे सोचते हैं कि उनकी स्वार्थी इच्छाएं पूरी हो

जाएंगी, और ऐसा करते हुए वे उस एक मार्ग को अनदेखा करके गुज़र जाते हैं जो उन्हें सच्चे धन तक पहुंचा सकता है। ऐसे लोगों से वे अधिकार के साथ बात करते हैं, और उन्हे आमंत्रित करते हैं कि वे उनके पीछे चलें। वे उन्हें ऐसे धन के पास ले जाने की बात करते हैं जो ऐसा स्थाई है जैसा अनन्त। वे अहम् के इनकार और बलिदान के संकरे मार्ग की तरफ इशारा करते

हैं। जो उस मार्ग पर आगे बढ़ते हैं, और हर एक बाधा को पार करते हैं, वे महिमा के देश में पहुँच जाएंगे। सूली उठाते हुए उन्हें यह एहसास होगा कि सूली उन्हें ऊँचा उठा रही है, और आख़िर में वे उस अक्षय ख़ज़ाने को पा लेंगे।

बहुत से लोग सांसारिक धन में अपनी सुरक्षा ढूँढते हैं। लेकिन मसीह उनकी आँखों में से वह लट्ठा निकालना चाहते हैं जो उन्हें देखने नहीं दे रहा है, और इस तरह उन्हें इस लायक बनाना चाह रहे हैं वे उन बातों को देख सकें जो श्रेष्ठ और अनन्त महिमा की बातें हैं।

 ऐसे लोग छलावों को हकीकत समझ रहे हैं, और इससे अनन्त संसार की महिमा उनकी नज़रों से छुप गई है। मसीह उन्हें बुलाते हैं कि वे अपनी दृष्टि वर्तमान से आगे ले

जाकर अनन्त पर लगाएं। हमें सूली को उठाना है, और मसीह के पीछे चलना है। सूली के पीछे चलने वालों को यह एहसास होगा कि सूली उन्हें ऊँचा उठाती है, उन्हें दृढ़ता और साहस देती है, और उन्हें ईश्वर के उस मेमने की तरफ ले जाती है जो जगत का पाप उठा ले जाता है।





अगर हम सूली का इनकार करते हैं, तो अनन्त जीवन खो देते हैं


"जो अपनी सूली नहीं उठाता और मेरे पीछे नहीं चलता,

वह मेरे लायक नहीं है।" मत्ती 10:38

सिर्फ दो तरह के ही लोग हो सकते हैं... और जो स्वामीभक्त नहीं हैं, वे शैतान के काले झण्डे के नीचे खड़े हैं, और उन पर यह दोष है कि उन्होंने मसीह का इनकार किया है और बुरे उद्देश्यों से उन्हें इस्तेमाल किया है। उन पर यह आरोप है कि उन्होंने जीवन और महिमा के प्रभु को सूली पर चढ़ाया है। 

जो सूली का इनकार करता है, वह उस प्रतिफल का इनकार करता है जो जिसकी प्रतिज्ञा विश्वासयोग्य लोगों से की गई है। कलवरी के सामने तब तक देखें जब तक कि ईश्वर के पुत्र का प्रेम आपके हृदय को पिघला नहीं देता। पाप में गिरे मनुष्य को ऊँचा उठाने और उसे शुद्ध करने में उन्होंने

कुछ भी बाकी नहीं छोड़ा है। तो क्या हम उनका अंगीकार न करें? क्या मसीह का सत्यकाम उसे पाने वाले को नीचा गिराएगा? नहीं। कलवरी के मनुष्य के पीछे चलने वाले के लिए नीचे गिरना नहीं होगा। दिन प्रतिदिन हम मसीह के चरणों में बैठे और उनसे सीखें, कि फिर हमारी बातचीत, हमारे आचरण, हमारे पहनने-ओढ़ने, और हमारे सारे कामों में हम सच्चाई प्रगट करते रहें कि यीशु हमारे जीवन में राज कर रहे हैं। ईश्वर हमें उस मार्ग में चलने के लिए बुलाते हैं जो उनके चलने के लिए जिन्हें प्रभु ने दाम चुका कर छुड़ाया

है।

 हमें संसार में नहीं चलना है। हमें ईश्वर को सब कुछ समर्पित कर देना है और सारे मनुष्यों के सामने मसीह को स्वीकार करना है।

"जो अपनी सूली उठा कर मेरे पीछे नहीं चलता, वह मेरे योग्य नहीं है। वह जो अपने प्राण बचाता है, उन्हें खोता है, और मेरे लिए अपने प्राण खोता है, उन्हें बचाता है।"

दिन प्रतिदिन हमें अपने अहम् का इनकार करना है, अपनी सूली उठानी है, और स्वामी के पचिन्हों पर चलना है। वह हमारे लिए खुशी की बात है कि परखे जाने का वक़्त अभी ख़त्म नहीं हो गया है। आइए हम नासरत के यीशु मसीह के नाम से कोने के पत्थर पर गिर कर टूट जाएं। नम्रता से, प्रेम से, एक पवित्र बातचीत से, एक संवेदना भरी आत्मा से, हम दूसरों के सामने

मसीह को स्वीकार करें। और, काश ऐसा हो कि जैसा यरूशलेम में पवित्र आत्मा दिए जाते समय हुआ था, वैसे ही वे अपनी महिमा हम पर भी प्रगट करें! मसीह की सूली हमारे लिए अनन्त जीवन की प्रतिज्ञा है।




 थका देने वाली सलीब जो शिमौन ने उठाई

"जब वे बाहर निकल रहे थे, तो उन्हें शिमौन नाम

का एक कुरैनी मिला। उन्होंने उसे बेगार में पकड़ा कि

उनकी सूली उठा कर ले चले।" मत्ती 27:32

मुक्तिदाता की सूली का बोझ उनकी निर्बल और पीड़ित दशा में उनके लिए बहुत भारी हो गया था। अपने शिष्यों के साथ फसह का भोजन करने के बाद उन्होंने न कुछ खाया था न कुछ पिया था। 

गतसमनी के बाग में उनका शैतानी शक्तियों के साथ भीषण संघर्ष हुआ था। सारी रात चलने वाले उस झूठे मुकद्दमे में उन्होंने दृढ़ता और गौरव के साथ खुद को संभाले रखा था। लेकिन जब दूसरी बार कोड़े मारने के बाद उन पर सूली लाद दी गई, तब उनका मानवीय शरीर उसे सह न सका। उसके बोझ तले वे बेहोशी जैसी

में दब गए थे। वह भीड़ जो उनके पीछे आ रही थी, उन्होंने उनके कमज़ोर और लड़खड़ाते हुए कदमों को देखा, लेकिन उनमें से किसी को उन पर कोई दया न आई। उनको सताने वालों ने देखा कि उनके लिए वह बोझ उठाना मुश्किल होता जा रहा था। वे इस उलझन में थे कि उस अपमानजनक बोझ को ढोने के लिए वे किसको पकड़ें; यहूदी खुद यह नहीं कर सकते थे।

ऐसे समय में एक परदेसी, कुरैन का शिमौन, जो गाँव से आया था, भीड़ में घिर गया। उसने भीड़ के ताने और अश्लील बातें सुनीं; उसने बार-बार उन्हीं तानों को दोहराए जाते सुनाः "रास्ता दो! रास्ता दो! यहूदियों के राजा को रास्ता दो! वह हैरान होकर उस नज़ारे को देखने क लिए रूक गया। और जैसे ही उसमें संवेदना की भावना नज़र आई, उन्होंने उसे पकड़ लिया और सूली उसके कंधों पर लाद दी। शिमौन ने यीशु के बारे में सुना था। 

उसके बेटे मुक्तिदाता में विश्वास करते थे लेकिन वह उनका शिष्य नहीं था। लेकिन अब, कलवरी तक सूली उठा ले जाना उसके लिए एक ऐसी आशीष बन गया, जिसके लिए वह जीवन भर आभारी रहा। इसके बाद तो उसने अपनी इच्छा

मसीह की सूली को जीवन भर उठाया, और खुशी के साथ उसके बोझ

के नीचे बना रहा। जो सूली शिमौन ने उठाई, वह उसके मन-फिराव का जरिया बनी। यीशु के लिए उसकी संवेदनाएं गहराई तक उत्तेजित हो गई; और कलवरी की घटनाएं, और मुक्तिदाता के मुख से निकले वचनों की वजह से, उसको स्वीकार करना पड़ा कि वे ईश्वर के पुत्र

हैं।




मंगलवार, 16 मार्च 2021

Bible verses about Easter

मार्च 16, 2021 0
Bible verses about Easter

 


Bible verses about Easter





bible verses about the resurrection of Jesus

      he is not here but his risen remember how he spake unto you when he was yet in Galilee saying the Son of Man must be delivered into the hands of sinful men.


 and be crucified and the third day rise again Luke chapter 24 verses 6 and 7 the angel answered and said unto the women fear not ye for I know that ye seek Jesus which was crucified he is not here for.


bible verses about resurrection of the dead


 he rises as he said come see the place where the Lord lay Matthew chapter28 verses 5 and 6 and he saith unto them be not freighted you seek Jesus of Nazareth which was crucified is risen he is not here behold the place where they laid him mark chapter16 verse 6 for I delivered unto you first of all that which I also received how that Christ died for our sins according to the scriptures.


easter bible verses


      and that he was buried and that he rose again the third day according to the scriptures and that he was seen of Cephas then of the twelve 1 Corinthians chapter 15verses 3 to 5knowing that Christ being raised from the dead dieth no more death hath no more dominion over him, Romans chapter 6verse 9 and said unto them thus it is written and thus it beloved Christ to suffer and to rise from the dead the third day and that repentance and remission of sins should be preached in his name among all nations.

    beginning at Jerusalem Luke chapter 24 verses 46 and47 for if we have been planted together in the likeness of His death we shall be also in the likeness of his resurrection Romans chapter 6 verse 5 Jesus said unto her I am the resurrection and the life he that believeth in me though he were dead yet shall he lives John chapter 11verse 25 and God hath both raised up theLord and will also, raise up us by his own power.

    1 Corinthians chapter 6 verse14 neither can they die anymore for they are equal unto the angels and are the children of God being the children of the Resurrection Luke chapter 20 verse36and if Christ be not raised your faith is vain you're yet in your sins 1Corinthians chapter 15 verse 17 for since by man came death by man came also the resurrection of the Dead 1Corinthians chapter 15 verse 21 for God so loved the world that He gave His only begotten Son that whosoever believeth in him should not perish but have everlasting life John chapter 3 verse 16[Music]jesus saith unto him I am the way the truth and the life no man cometh unto the Father but by me, John chapter 14verse 6 therefore.



bible verses about resurrection of believers

       we are buried with him by baptism into death that like asChrist was raised up from the dead by the glory of the Father, even so, we also should walk in the newness of life Romans chapter 6 verse 4[Music]but the rest of the Dead lived not again until the thousand years were finished this is the first resurrection revelation. chapter 20 verse five and with great power gave the Apostles witness of the resurrection of the Lord Jesus and great grace was upon them all.

  Acts chapter four verse 33but for us also the humans shall be imputed if we believe in Him that raised up.


    Jesus our Lord from the dead who was delivered for our offenses and was raised again for our justification Romans chapter 4 verses 24 and 25 that Christs should suffer and that he should be the first that should rise from the dead and should show light unto the people and to the Gentiles.

what chapter is easter in the bible

   Acts chapter26 verse 23 but is now mad Donaldmanifest by the appearing of our savior Jesus Christ who hath abolished death and hath brought life and immortality to light through the gospel 2 Timothy chapter 1 verse 10 thou which has two showed me great and sore troubles shout quicken me again and shalt bring me up again from the depths of the earth.


     Psalm chapter 71 verse 20 and when I saw him I fell at his feet as dead and he laid his right hand upon me saying unto me fear not I am the first and the last I am he that liveth and was dead and behold I am alive forevermore amen and have the keys of hell and ofdeathRevelation chapter 1 verse 17 and 18and this is the father's will which hath sent me that of all which he hath given me I should lose nothing boo-tee should raise it up again on the last day.

    John chapter 6 verse 39 whoso eateth my flesh and drinketh my blood hath eternal life and I will raise him up at the last day john chapter 6 verse 54before I know that my Redeemer liveth and that he shall stand at the latter day upon the earth and though after my skin worms destroy this body yet in my flesh shall I see God whom I shall see for myself and my eyes shall behold and not another though my reins are consumed within me.

   job chapter 19 verses25 and 26and have hope toward God which they themselves also allow that there shall be a resurrection of the dead both of the just and unjust Acts chapter 24verse 15 but if the spirit of him that raised up Jesus from the dead dwell in you he that raised up Christ from the dead shall also quicken your mortal bodies by his Spirit that dwelleth new.

    Romans chapter 8 verse 11 for if we believe that Jesus died and rose again even so them also which sleep and Jesus will God bring with him.

     1 Thessalonians chapter 4 verse 14thy dead men shall live together with my dead body shall they arise awake and sing ye that dwell in dust for thy duties as the dew of herbs and the earth shall cast out the dead Isaiah chapter26 verse 19 and many of them that sleep in the dust of the earth shall awake some to everlasting life and some to shame and everlasting contempt.

      Daniel chapter 12 verse 2 blessed be the God and father of our Lord Jesus Christ which according to his abundant mercy hath begotten us again unto a lively hope by the resurrection of Jesus Christ from the dead to an inheritance incorruptible and undefiled and that fadeth not away reserved in heaven for you Peter chapter 1 verses 3 and 4 and with great power gave the Apostles witness of the resurrection of the Lord Jesus and great grace was upon them all.

     Acts chapter 4 verse 33 and they found the stone rolled away from the sepulcher and they entered in and found not the body of the Lord Jesus Luke chapter 24verse 2 and 3 that if thou shalt confess with thy mouth the Lord Jesus and shalt believe in the heart that God hath raised him from the dead thou shalt besavedRomans chapter 10 verse 9who is he that condemneth it is Christ that died yea rather that is risen again who is even at the right hand of God who also maketh intercession for us.

     Romans chapter 8 verse 34 for as Jonas was three days and three nights in the whale's belly so shall the Son of Man be three days and three nights in the heart of the earth Matthew chapter 12 verse 40[Music]that I may know him and the power of his resurrection and the Fellowship of His sufferings being made conformable unto his death Philippians chapter 3 verse 10who is he that condemneth


शुक्रवार, 12 मार्च 2021

परमेश्वर की कहानी: पाम संडे Palm Sunday 2021

मार्च 12, 2021 0
परमेश्वर  की कहानी:  पाम संडे Palm Sunday 2021


परमेश्वर  की कहानी:  पाम संडे Palm Sunday




बाइबल में पाम संडे का क्या मतलब है?

       पाम संडे तो परमेश्वर  की कहानी का एक दिन होता है, जिसे हम पाम संडे कहते हैं और ऐसे शुरू होता है। याद रखें कि परमेश्वर ने हमें बचाने के लिए अपने पुत्र यीशु को कैसे भेजा था? ठीक है,

  हर कोई यह नहीं मानता था कि यीशु वास्तव में परमेश्वर के पुत्र और बचावकर्ता थे, लेकिन जो लोग उस पर विश्वास करते थे। क्या पाम रविवार को कुछ बहुत अच्छा था। यह यीशु के लिए किसी अन्य दिन की तरह ही शुरू हुआ। 

वह अपने शिष्यों के साथ येरूशलम जा रहा था लेकिन वहाँ पहुँचने से पहले यीशु ने कुछ आश्चर्यचकित किया। वह रुक गया और अपने दो शिष्यों को पास के गाँव से एक युवा गधा लेने के लिए भेजा। यहाँ तक ​​कि उसने उन्हें ठीक वही बताया जहाँ मालिक ने आखिरी बार उसे बाँध दिया था। 

उन्हें यक़ीन नहीं था कि उन्हें गधे की आवश्यकता क्यों थी लेकिन उन्होंने उनकी बात मानी। बच्चे, क्या आप यीशु की बात मानने के लिए तैयार होंगे, भले ही वह आपसे कुछ ऐसा करने के लिए कहे जो आपको समझ में नहीं आया? वैसे भी, जब शिष्य गधे के साथ वापस लौटते हैं, तो वे अपने कोड़ों को अपनी पीठ पर ऐसे फेंकते हैं जैसे एक काठी और यीशु ऊपर चढ़ गए थे।

बहुत जल्द, चेलों ने देखा कि यीशु को इसकी आवश्यकता क्यों है। देखें, लोगों की भीड़ सड़क पर गई और यीशु के लिए एक रास्ता बनाने के लिए कोट और पेड़ की शाखाओं को बिछाना शुरू कर दिया। जब ऐसा हुआ, तो कई लोगों ने माना कि यीशु एक राजा था। 

केवल राजा इस तरह एक शहर में आए। इसलिए यीशु ने गधे की सवारी की-जैसे वह एक-परेड था और भीड़ ने चीजों की चिल्लाकर यीशु की प्रशंसा की, & quot; धन्य है वह राजा जो प्रभु के नाम से आता है! स्वर्ग में शांति और उच्चतम में महिमा क्योंकि वे मानते थे कि यीशु बचावकर्ता था। लेकिन याद रखें कि कुछ लोगों को विश्वास नहीं था कि यीशु परमेश्वर का पुत्र था? ठीक है, उन्होंने यीशु से कहा कि हर कोई चिल्लाना बंद करे। 

उन्होंने नहीं सोचा था कि यीशु को राजा की तरह माना जाएगा। क्या आप जानते हैं कि यीशु ने क्या कहा था? उसने उनसे कहा,  यदि वे चुप रहते हैं, तो चट्टानें रोएँगी!  खैर, जो लोग यीशु पर विश्वास नहीं करते थे, उन्हें लोगों या चट्टानों की प्रशंसा करना अच्छा नहीं लगता था और जिसने जीसस को दुखी किया; वह वास्तव में रोने लगा और रोना ही नहीं, रोना भी। 


यहाँ, लोग उस बचावकर्मी के बगल में खड़े थे जिसे वे चाहते थे और अपने पूरे जीवन की प्रतीक्षा कर रहे थे और वे इसे याद कर रहे थे। लेकिन भले ही यीशु रोया, पाम रविवार एक दुखद कहानी नहीं है। ईस्टर सभी यीशु के अद्भुत बचाव के बारे में है और पाम संडे इस बात की याद दिलाता है कि बचाव कितना ख़ास है और यीशु सभी से कितना प्यार करता है और पाम संडे की कहानी भी यही है। तो मामले में, आप इसे याद किया, यहाँ त्वरित संस्करण है। जीसस यात्रा कर रहे थे। 

   उसने अपने शिष्यों को गधा पाने के लिए भेजा। लोग सड़क पर कोट और शाखाएँ फैलाते हैं। उन्होंने यीशु की प्रशंसा की। कुछ लोगों ने नहीं पहचाना कि वह राजा था। जिससे यीशु दुखी हुआ। वह उन्हें छुड़ाने आया था। कुछ दिनों बाद, वह दिखाएगा कि वह हमसे कितना प्यार करता है और यह परमेश्वर  की कहानी का एक हिस्सा है।

 


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